ख़याल ए मजबूर है हम और आप भी मजबूर
मोहब्बत इसे नाम देते है लोग, पर हम करते है न मंज़ूर
नाम इसका है नही और शायद होगा भी नही
मोहब्बत से बहुत ऊंचा जो है यह जान ए हुज़ूर
मोहब्बत इसे नाम देते है लोग, पर हम करते है न मंज़ूर
नाम इसका है नही और शायद होगा भी नही
मोहब्बत से बहुत ऊंचा जो है यह जान ए हुज़ूर
