PAGES

Sunday, February 26, 2017

ज़ालिम

ज़ालिम केहता है तुम्हे ज़माना तन्हा जो छोड़ दिया हमें 
इल्ज़ाम लगाती है क़त्ल कि, क़त्ल जो किया हमें 
पर मैं तो केहता हूँ मरगया मैं कब का 
ज़िन्दगी जो बिताया था कुछ पल तेरे साये में
अब कोई कुछ भी कहे, हम आराम करते है 
साथ लेकर वो यादें जो तुमने दिया हमें

No comments:

Post a Comment