PAGES

Monday, October 26, 2015

तेरे शरमाने से

गुलशन बनगया मेरा जहाँ तेरे आने पे 
जन्नत बनगयी ये समा तेरे मुस्कुराने पे 
जीने की चाहत लायी हो तुम ज़िन्दगी में 
पर मर न जाये कही तेरे शरमाने से 

No comments:

Post a Comment