PAGES

Wednesday, September 17, 2014

किसे बया करू

सैकड़ो बातें है दिल में 
पर सुनाने के लिये धड़कन नहीं 
किसे बया करू इस उलझन को 
जब सुनने के लिये साजन नहीं 

No comments:

Post a Comment