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Saturday, September 13, 2014

अश्क़ों के सैलाब

बुने थे ख्वाब कई 
पर मिले अश्क़ों के सैलाब कई 
रो रो कर ऐसी हालत हुई अपनी 
अब आँसू बेहते नहीं, लगता है  
सूख गये जहाँ में तलाब कई 

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