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Friday, April 4, 2014

यु होता तो कैसा होता

सोचो अगर यु होता तो कैसा होता 
तारों पे अपना घर होता 
चाँद अपना छत, अम्बर पे नगर होता 
बादलों का ताज और तितलियों का राज होता 
कल कुछ भी नहीं सब कुछ आज होता 
बच्चों के खयालों से बना जहाँ  होता 
उनके सरगम से सजा हर साज़ होता 
मोतियों से बना जहाज़ होता 
किताब पन्नों से नहीं, हीरों से बुना होता 
झील पे नाव कि जगह, जुगनुओं का मकान होता 
रंगीन नज़ारों से ज़िन्दगी जमा होता 
सोचो अगर यु होता तो कैसा होता  

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