PAGES

Thursday, January 9, 2014

प्यार का क़र्ज़

ज़िंदगी भर चुका नहीं सकता, आपका प्यार का क़र्ज़ 
लेकिन हिफाज़त कर सकता हूँ आपका मानकर अपना फ़र्ज़ 

No comments:

Post a Comment