PAGES

Monday, March 25, 2013

कलियों का चमन

संग-ए-मरमर से तरसा हुआ बदन
गगन जैसा विशाल नयन जिन्हें देखकर झुके ख़ुद गगन
ऐसे कोमल होंठ जिससे शर्माती है भुवन
ऐसा साजन मिले तोह यह जीवन है कलियों का चमन

No comments:

Post a Comment