PAGES

Monday, March 25, 2013

मोहब्बत-ए-नामा

यादें रह जाती अगर हम गुज़र गए तो
बातें रह जाती अगर हम बिछड़ गए तो
ए दोस्त मुलाकाते गुज़र जाती है फिर मिलने के लिए
क्यू की गुज़रना है सबको यहाँ कभी न कभी

No comments:

Post a Comment