PAGES

Monday, March 25, 2013

खिलने का इन्तेज़ार

गुलज़ार में खिले फूलों को क्यूँ बेचते है बाज़ार में
और उन्हें खरीदने को क्यूँ आते है लोग बाज़ार में
हमे येह समझ आयी जब आए थे आपके दीदार में
हम भी आज़माना चाहते है खरीदने की औज़ार को
अब तो जी रहे है तुम्हारी खिलने की इन्तेज़ार में

No comments:

Post a Comment