PAGES

Monday, January 21, 2013

वजह दिल दर्द का

वजह है तू दिल दर्द के लिए 
मगर मैं तुम्हे मुजरिम नही मानता 
चाहे जितना भी ज़ख्म दे हमें 
फिर भी तुम्हे सच्चे दिल से चाहता

No comments:

Post a Comment