PAGES

Monday, January 21, 2013

पी रहा

वो हसीन ख्वाब वो हुस्न का शबाब
हर नज़ारा जो था लाजवाब
करते जो थे लोग हमे हर मोड़ पे आदाब
हर कोई लगता था हसीन जनाब
गुज़र चुका सफर मैं वो ख्वाब
याद करके उन्हें, पी रहा बेजान शराब

No comments:

Post a Comment