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Friday, May 25, 2012

गौर न कर

लिखी लिखाई पे गौर न कर 
लफ़्ज़ों के मतलब पे गौर न कर 

हाल-ए-दिल कुछ यु है तड़पती हुई 
आसुओं की नमी पे गौर न कर 

गाल नम है, भीगे होठ भी 
इस गीलापन का कभी गौर न कर 

सुख, चैन खो कर रात भर जो रोया 
रोने की वजह का गौर न कर 

कर तो कर गौर-ए-मोहब्बत का 
वरना ज़िन्दगी या मौत का गौर न कर

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